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Friday, November 27, 2009

युवा शक्ति -राष्ट्र शक्ति

युवा शक्ती राष्ट्र शक्ती --

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किसी भी राष्ट्र का भविष्य इस बात पर निर्भर करताहै की उस राष्ट्र का युवा कितना शसक्त है ,अगर राष्ट्र का युवा शक्तिवान है ,चरित्रवान है तो उस राष्ट्र के भविष्य को कोई खतरा नही है ,चाहे कोई भी देश हो उस देश के भविष्य का निर्माण युवाओ के भविष्य पर निर्भर करता है ,युवा राष्ट्र की नींव नींव होते है जिसके ऊपर सम्पूर्ण राष्ट्र का भार होता है ,अगर नींव ही कमजोर हो गई तो सम्पूर्ण राष्ट्र का अस्तित्व खतरे में पड़ जाता है ,क्योकि युवा ही अपने मजबूत कन्धों से देश का भार उठाने में सक्षम है ,हर शक्तिशाली राष्ट्र के पीछे समर्थवान और शक्तिवान युवाओं का हाथ होता है , वो व्यक्ति जिसने अपने बाजुओं के दम पर सम्पूर्ण विश्व पर अपना अधिपत्य कायम किया था वो युवा ही था [शिकंदर ] युवाओं में जोश होता है जो किसी भी तूफ़ान से टकराने की हिम्मत रखते है ।

और हम आपको तो गर्व होना चाहिए की हमने ऐसे राष्ट्र में जन्म लिया है जिसके नोजवानो के द्वारा किए गए कार्य आज इतिहास में स्वर्णिम पंक्तियों में अंकित है ,वो हमारे देश के युवा क्रांतिकारी ही थे सरदार भगत सिंह ,राजगुरु ,शुख्देव ,अश्फाकुल्लाखान ,चन्द्रसेखर आज़ाद .जिनका नामे सुनते ही अंग्रेज हुकूमत कांपने लगती थी ,इन अमर सपूतो ने अपने राष्ट्र के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन कुर्बान कर दिया इन्होने कभी अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे नही सोचा और न ही कभी अपने लिए जिए ये जिए तो सिर्फ़ राष्ट्र के लिए जिए इन्होने प्रण कर लिया था की अगर परमात्मा ने मानव रुपी जीवन प्रदत्त किया है तो इसे अपनी मात्रभूमि की खातिर बलिदान करदेंगे .धन्य हैं भारत के वीर जो हंसते हुए अपने राष्ट्र के लिए समर्पित हो गए, ये देश है खुदीराम बोस,भगत सिंह , जैसे युवा क्रांतिकारियों का जो हंसते हुए माँ भरती के खातिर .अपने राष्ट्र की अस्मिता और अखंडता की खातिर ,अपने राष्ट्र के स्वभिमान की खातिर हंसते हुए फांसी पर झूल गए, भारत माँ के इन बेटों ने मौत को स्वीकार किया परन्तु कभी अंग्रेजो के सामने नही झुके इनका मानना था की हमारे शरीर में बहती हुयी रक्त की एक एक बूँद हमारे राष्ट्र की है जब जरुरत पड़े बसूल कर लेना,,, .धन्य हैं गुरुगोविंद सिंह के वो दोनों बेटे जिन्होंने मरना स्वीकार किया परन्तु दुश्मन के सामने झुके नही जब गुरु गोविन्द सिंह जी के छोटे बेटे को दीवार में पहले चुनने के लिए कहा गया तो बड़े भाई की आँखों में आसू आने लगते है तो छोटा भाई शेर की तरह दहाड़ मारकर अपने बड़े भाई से कहता है भइया तुम रो रहे हो तुम जानते नही की हम गुरुगोविंद सिंह के बेटे है जिन्होंने हमे सिखाया है की अगर कोई व्यक्ति जो राष्ट्र और धर्म के खिलाफ कार्य करता है वो चाहे इस लोक का हो या उस लोक का हो उससे कभी डरना नही चाहिए और आप रो रहे हो तो बड़ा भाई उत्तर देते हुए कहता है की भइया में डर नही रहा हू हमारे पिताजी ने तो हमे काल से भी लड़ने का हौसला दिया है अरे दुःख तो मुझे इस बात का है की इस मात्रभूमि पर पहले मैंने जन्म लिया और इसके बाद तुम्हारा जन्म हुआ ,और जब इस मात्रभूमि का का कर्ज चुकाने का वक्त आया ,इस राष्ट्र के लिए कुछ करने का वक्त का आया तो तुम मुझसे आगे निकल गए और में पीछे रह गया ,में रो इसलिए रहा हू की जन्म मैंने पहले लिया है और मात्रभूमि पर न्योछावर पहले तुम हो रहे हो.धन्य है ऐसे वीर जिनकी राष्ट्र के प्रति ऐसी निर्मल भावना है .ऐसे नौजवानों को में साष्टांग दंडवत प्रणाम करता हू...........

3 comments:

  1. ITS TOO GOOD,,,,U R VERY GOOD RIGHTER,,,ALL THE BEST FOR YOUR BRIGHT FUTURE,,,JAI HIND JAI BHARAT ,,JAI CONGRESS

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  2. You not only a good writer but a good poet too...
    it,s great....

    congratulations....

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  3. bahut bahut dhanyawaad geeta ji aap isi tarah mujhpar sneh or ashirwaad banaye rakhe..

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